छत्तीसगढ़
बलौदाबाजार जिले का नाम बदला गया अब इस नाम से जाना जाएगा जिले का नाम
रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार ने बलौदाबाजार जिले का नाम बदलने का फैसला लिया है। अब यह जिला संत शिरोमणि गुरु घासीदास बाबा जी के नाम पर “गुरु घासीदास धाम” कहलाएगा। इसके साथ ही, इसे राष्ट्रीय तीर्थस्थल भी घोषित किया जाएगा। अपर कलेक्टर को जारी आदेश में अधिकारियों से इस फैसले पर स्पष्ट राय देने को कहा गया है। प्रशासन से जल्द से जल्द आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं।

रायपुर निगम बजट में 4 नए फ्लाईओवर और महिलाओं के लिए बनेंगे 3 हॉस्टल
Budget 2025 : रायपुर नगर निगम में मेयर मीनल चौबे ने 1 हजार 529 करोड़ रुपए का बजट पेश किया। इसमें शहर में चार जगहों पर 4 नए फ्लाई ओवर बनाए जाएंगे। इनमें उद्योग भवन, राजेन्द्र नगर, सरोना, तेलीबांधा चौक शामिल है। वहीं, 3 जगहों पर वर्किंग विमेंस हॉस्टल और विमेन रेस्ट रूम बनाए जाएंगे। इसमें सेनेटरी वेंडिंग मशीन और बेबी फीडिंग रूम भी होंगे।
छत्तीसगढ़ में खुलेगी शराब की 67 नई दुकानें, प्रीमियम स्टोर्स भी होंगे शुरू!
छत्तीसगढ़ में एक अप्रैल 2025 से 67 नई शराब दुकानें खोली जा रही हैं. नई आबकारी नीति में नई दुकान खोलने का निर्णय लिया गया है. साथ ही प्रीमियम शॉप के संचालन की भी अनुमति दी गई है. नई 67 दुकानें खुलने से दुकानों की संख्या बढ़कर 741 हो जाएगी.
छत्तीसगढ़ में भारी बारिश और ओलावृष्टि: देखे किन जिलों में येलो अलर्ट हुआ जारी..
छत्तीसगढ़ में मौसम ने अप्रत्याशित रूप से करवट ली है, जिसके कारण राज्य के कई जिलों में भारी बारिश और ओलावृष्टि हुई। इस मौसम परिवर्तन ने एक ओर भीषण गर्मी से राहत प्रदान की है, तो दूसरी ओर किसानों और स्थानीय निवासियों के लिए नई चुनौतियां पैदा कर दी हैं। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने राज्य के लिए येलो अलर्ट जारी करते हुए आने वाले दिनों में मौसम के और खराब होने की संभावना जताई है।
प्रमुख प्रभावित क्षेत्र
राज्य के उत्तरी और मध्य हिस्सों में बारिश और ओलावृष्टि का सबसे अधिक प्रभाव देखा गया है। बलरामपुर जिले के लहसुनपाट और सामरीपाट क्षेत्रों में इतनी अधिक ओलावृष्टि हुई कि सड़कें और खेत बर्फ की चादर से ढक गए। स्थानीय लोगों का कहना है कि इन क्षेत्रों का दृश्य कश्मीर जैसा प्रतीत हो रहा है। इसके अलावा, सूरजपुर, कोरिया, जशपुर, और सरगुजा जैसे जिलों में भी तेज आंधी और बारिश दर्ज की गई है।
मौसम विभाग की चेतावनी
IMD के अनुसार, आने वाले 48 घंटों में राज्य के अधिकांश हिस्सों में तेज बारिश और ओलावृष्टि होने की संभावना है। रायपुर, बिलासपुर, बस्तर और सरगुजा संभागों के लिए विशेष रूप से येलो अलर्ट जारी किया गया है। विभाग ने लोगों को सतर्क रहने और खराब मौसम के दौरान यात्रा से बचने की सलाह दी है।
इस बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से किसानों को सबसे अधिक नुकसान हुआ है। रबी फसल, जो कटाई के लिए लगभग तैयार थी, अब भारी बारिश और ओलावृष्टि के कारण क्षतिग्रस्त हो रही है। गेहूं, चना, सरसों और सब्जियों की फसल पर इसका गहरा प्रभाव पड़ा है। किसानों का कहना है कि यदि बारिश इसी प्रकार जारी रही, तो उनकी मेहनत पूरी तरह बर्बाद हो जाएगी।
तापमान में गिरावट
मौसम में आए इस बदलाव के कारण राज्य के कई हिस्सों में तापमान में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है। दिन और रात के तापमान में 4-5 डिग्री सेल्सियस की कमी आई है। लोगों ने इस मौसम को गर्मी से राहत के रूप में देखा है, लेकिन यह राहत अस्थायी हो सकती है।
स्थानीय प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने की अपील की है। बिजली कटौती, जलभराव और यातायात प्रभावित होने की संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए तैयारी शुरू कर दी गई है। कृषि विभाग भी नुकसान का आकलन कर रहा है, ताकि प्रभावित किसानों को राहत प्रदान की जा सके।
छत्तीसगढ़ में हालिया मौसम परिवर्तन ने जहां गर्मी से राहत दी है, वहीं यह किसानों और ग्रामीण क्षेत्रों के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है। IMD द्वारा जारी येलो अलर्ट को ध्यान में रखते हुए, लोगों को सतर्क रहने और सुरक्षित स्थानों पर बने रहने की सलाह दी गई है। प्रशासन को फसलों के नुकसान का आकलन कर किसानों को जल्द सहायता प्रदान करनी चाहिए, ताकि उनकी आर्थिक स्थिति स्थिर बनी रहे।
यात्रीगण कृपया ध्यान दे रायपुर में रेलवे ने बंद किए कई कैश काउंटर, यात्री हो रहे परेशान
रेलवे द्वारा डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कैश काउंटर कम किए जाने का असर यात्रियों पर साफ दिखाई दे रहा है। आरक्षण और अनारक्षित टिकट केंद्रों पर यात्रियों को लंबे इंतजार और असुविधा का सामना करना पड़ रहा है।
मुख्य बिंदु:
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लंबी लाइनें और डिजिटल पेमेंट की चुनौती
रायपुर रेलवे स्टेशन पर अनारक्षित टिकट काउंटरों पर यात्रियों को लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। डिजिटल पेमेंट के लिए बनाए गए विशेष काउंटरों पर खड़े होकर जब यात्री पहुंचते हैं, तो पता चलता है कि वह केवल ऑनलाइन भुगतान के लिए है। ऐसे में यात्रियों को दोबारा कैश काउंटर पर लाइन में लगना पड़ता है, जिससे उनकी ट्रेनें छूट रही हैं।
आरक्षण केंद्रों की स्थिति
मुख्य टिकट आरक्षण केंद्र पर चार काउंटर बंद कर दिए गए हैं, जिससे यात्रियों को अधिक समय तक इंतजार करना पड़ रहा है। वरिष्ठ नागरिक, सांसद, विधायक और पत्रकारों के लिए आरक्षित विशेष काउंटर भी बंद कर दिए गए हैं, जिससे इन श्रेणियों के यात्रियों को खासा नुकसान हो रहा है।
ट्रेन रद्द होने पर रिफंड के लिए परेशानी
ट्रेनें रद्द होने पर रिफंड लेने के लिए स्टेशन पर लगी लंबी लाइनों में यात्री घंटों तक खड़े रहते हैं। खासतौर पर वरिष्ठ नागरिकों के लिए यह प्रक्रिया अधिक कठिन हो गई है। कर्मचारियों के अनुसार, पहले हर महीने लगभग 4,000 रिजर्वेशन टिकट बनते थे, लेकिन अब यह संख्या कम हो गई है।
तत्काल टिकट लेने में बढ़ी मुश्किलें
तत्काल टिकट काउंटरों पर डिजिटल पेमेंट प्रक्रिया में 30 से 50 सेकंड का समय लगने के कारण कई यात्रियों को समय पर टिकट नहीं मिल पा रहा। लंबी लाइनों में खड़े यात्री शिकायत कर रहे हैं कि कैश काउंटर बंद करना गलत निर्णय है।
अतिरिक्त कोच की सुविधा
दक्षिण-पूर्व-मध्य रेलवे ने दुर्ग-निजामुद्दीन हमसफर एक्सप्रेस में यात्रियों की सुविधा के लिए अस्थायी रूप से एक एसी-3 कोच उपलब्ध कराया है।
- ट्रेन नंबर 22867 दुर्ग-निजामुद्दीन हमसफर एक्सप्रेस में 21 से 25 मार्च तक यह सुविधा उपलब्ध रहेगी।
- ट्रेन नंबर 22868 निजामुद्दीन-दुर्ग हमसफर एक्सप्रेस में 22 से 26 मार्च तक यह कोच लगाया जाएगा।
डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देने का यह कदम सही दिशा में है, लेकिन यात्रियों की असुविधा को ध्यान में रखते हुए कैश काउंटरों को चालू रखना भी आवश्यक है। रेलवे प्रशासन को इस निर्णय पर पुनर्विचार करना चाहिए ताकि यात्रियों को परेशानी न हो।
छत्तीसगढ़ के धमतरी में महिला ने एकसाथ 4 बच्चों को दिया जन्म, इनमें 3 बेटियां और 1 बेटा....
छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में एक महिला ने एक साथ चार बच्चों को जन्म दिया। इनमें तीन लड़की और 1 लड़का है। निर्धारित समय से पहले 7 महीने में ही डिलवरी हुई। प्रसूता नगरी ब्लॉक के कौहाबाहरा की रहने वाली है।
बिलासपुर हाईकोर्ट का ऐतिहासिक निर्णय: संविदा और दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों के नियमतिकरण का दिया आदेश
रायपुर, 20 मार्च 2025: बिलासपुर हाईकोर्ट ने छत्तीसगढ़ में कार्यरत संविदा और दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों के लिए एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक आदेश सुनाया है। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (NIT) रायपुर में कार्यरत कर्मचारियों की याचिका पर न्यायाधीश एके प्रसाद ने यह आदेश दिया है कि चार महीने के भीतर इन कर्मचारियों को नियमित किया जाए। यह निर्णय प्रदेश के हजारों ऐसे कर्मचारियों के लिए एक बड़ी राहत के रूप में आया है, जो वर्षों से अस्थायी आधार पर कार्यरत थे।
कर्मचारियों के नियमितीकरण का आधार:
कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि याचिकाकर्ताओं को काम करते हुए 10 साल से अधिक का समय हो चुका है, और इन कर्मचारियों के पास पर्याप्त अनुभव भी है। न्यायालय ने यह निर्देश दिया कि कर्मचारियों को उनके वर्तमान पद पर ही नियमित किया जाए। इस फैसले से न केवल NIT रायपुर में कार्यरत कर्मचारियों, बल्कि प्रदेश के विभिन्न सरकारी संस्थानों में कार्यरत संविदा और दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को भी उम्मीद की किरण दिखाई दी है।
प्रदेशभर के कर्मचारियों में जगी उम्मीद
इस ऐतिहासिक निर्णय के बाद, छत्तीसगढ़ के विभिन्न सरकारी संस्थानों में कार्यरत ऐसे कर्मचारियों को नियमितीकरण की उम्मीद जगी है। छत्तीसगढ़ प्रगतिशील अनियमित कर्मचारी फेडरेशन ने राज्य सरकार से यह अपील की है कि अन्य सरकारी संस्थानों में कार्यरत सभी ऐसे कर्मचारियों को भी नियमित किया जाए। कर्मचारियों का कहना है कि इस फैसले से उनकी कार्यस्थल पर सुरक्षा और स्थिरता सुनिश्चित होगी।
कांग्रेस सरकार के वादे की दिशा में एक कदम:
इस मामले की जड़ 2018 में कांग्रेस पार्टी के घोषणा पत्र से जुड़ी हुई है, जिसमें पार्टी ने संविदा और दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों के नियमितीकरण का वादा किया था। भूपेश सरकार बनने के बाद, 11 दिसंबर 2019 को प्रमुख सचिव वाणिज्य एवं उद्योग विभाग की अध्यक्षता में एक समिति गठित की गई थी, जिसका उद्देश्य कर्मचारियों के नियमितीकरण पर रिपोर्ट तैयार करना था। 16 सितंबर 2022 को कर्मचारी संगठनों की मांग पर एक और समिति का गठन किया गया, जो इस मामले की जाँच कर रही थी।
याचिका का विवरण और कोर्ट का निर्णय:
यह याचिका याचिकाकर्ता नीलिमा यादव, रश्मि नागपाल और 40 अन्य कर्मचारियों द्वारा लगाई गई थी। अधिवक्ता दीपाली पाण्डेय के माध्यम से इन कर्मचारियों ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी, जिसमें बताया गया था कि इन कर्मचारियों ने लिखित परीक्षा उत्तीर्ण की थी और बाद में साक्षात्कार और मेरिट के आधार पर NIT रायपुर में नियुक्ति पाई थी। याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट के अन्य राज्य में पारित आदेशों को भी अपनी याचिका में न्यायिक दृष्टांत के रूप में प्रस्तुत किया था। कोर्ट ने इन तर्कों को ध्यान में रखते हुए अपने आदेश में कर्मचारियों के नियमितीकरण का निर्देश दिया।
राज्य सरकार ने नियमों में किया बदलाव:
बिलासपुर हाईकोर्ट के आदेश के बाद, राज्य सरकार ने भर्ती नियमों में संशोधन कर दिया है। सामान्य प्रशासन विभाग के नए निर्देशों के अनुसार, छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (SGRY) सरगुजा में क्षेत्रीय समन्वयक और लेखा सह MIS सहायक पदों के लिए अब केवल सरगुजा जिले के मूल निवासियों को आवेदन करने की अनिवार्यता समाप्त कर दी गई है। अब इन पदों के लिए पूरे राज्य के लोग आवेदन कर सकते हैं। यह निर्णय पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार द्वारा 29 सितंबर 2022 को जारी किए गए विज्ञापन से संबंधित है, जिसमें केवल सरगुजा के निवासी पात्र माने गए थे।
इस महत्वपूर्ण न्यायिक निर्णय ने छत्तीसगढ़ में संविदा और दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों के लिए एक नई उम्मीद पैदा की है। राज्य सरकार के नियमों में बदलाव और हाईकोर्ट के आदेश के बाद, लाखों कर्मचारी अब अपने भविष्य को लेकर ज्यादा आश्वस्त महसूस कर रहे हैं। यह कदम न केवल कर्मचारियों के लिए राहत का कारण बना है, बल्कि प्रदेश की प्रशासनिक प्रणाली में सुधार की दिशा में भी एक अहम कदम है।
Naxal Attack : सुरक्षा बलों और माओवादियों के बीच बीजापुर में मुठभेड़: दो माओवादी और एक जवान शहीद
बीजापुर, छत्तीसगढ़: बीजापुर जिले के गंगालूर क्षेत्र में आज सुबह सुरक्षा बलों और माओवादियों के बीच मुठभेड़ हुई। इस संघर्ष में दो माओवादी मारे गए और जिला रिजर्व गार्ड (डीआरजी) का एक जवान शहीद हो गया। सुरक्षा बलों ने मौके से हथियार और विस्फोटक सामग्री बरामद की है।
मुठभेड़ का विवरण:
सुरक्षा बलों की संयुक्त टीम गंगालूर क्षेत्र में माओवादियों के खिलाफ अभियान चला रही थी, तभी माओवादियों ने अंधाधुंध गोलीबारी शुरू कर दी। इस पर सुरक्षा बलों ने भी जवाबी कार्रवाई की, जिससे मुठभेड़ शुरू हो गई। करीब सुबह 7 बजे से जारी इस मुठभेड़ में दो माओवादी मारे गए, जिनकी पहचान की प्रक्रिया जारी है। साथ ही, शहीद जवान का शव भी बरामद किया गया है। citeturn0search3
सुरक्षा बलों की कार्रवाई:
मुठभेड़ स्थल से सुरक्षा बलों ने दो माओवादियों के शव, एक एसएलआर, एक 12 बोर की बंदूक, एक 315 बोर की राइफल, एक पिस्टल और विस्फोटक सामग्री बरामद की है। सुरक्षा बलों का अभियान अभी भी जारी है, और इलाके में तलाशी अभियान चलाया जा रहा है। यह मुठभेड़ पिछले महीने की एक बड़ी कार्रवाई के बाद हुई है, जिसमें सुरक्षा बलों ने महाराष्ट्र सीमा से माओवादियों पर अचानक हमला कर 31 माओवादियों को मार गिराया था। उस ऑपरेशन में दो सुरक्षा कर्मी भी शहीद हुए थे।
छत्तीसगढ़ के 70,000 शिक्षकों के लिए खुशखबरी! सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला – मिलेगा उन्नत वेतनमान
सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: छत्तीसगढ़ के शिक्षकों को मिलेगा न्याय और उन्नत वेतनमान
सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा दायर विशेष अनुमति याचिका (SLP) को खारिज कर दिया है, जिससे राज्य के हजारों शिक्षकों को उन्नत वेतनमान मिलने का रास्ता साफ हो गया है। इस ऐतिहासिक फैसले से लगभग 70,000 शिक्षकों को लाभ मिलेगा और राज्य सरकार पर लगभग 7,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त वित्तीय भार पड़ेगा।
क्या है पूरा मामला
2013 में तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने शिक्षकों के 10 वर्षों की सेवा पूरी होने पर उन्नत वेतनमान देने की घोषणा की थी। लेकिन 2014 में सरकार ने एक नया वेतनमान लागू कर दिया और पहले घोषित उन्नत वेतनमान को रद्द कर दिया। इससे शिक्षकों में असंतोष फैल गया।
सोनू साहू नामक सहायक शिक्षक, जो 2005 में नियुक्त हुए थे, को 10 वर्षों के बाद भी न पदोन्नति मिली और न ही उन्नत वेतनमान। उन्होंने छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय में याचिका दायर की, जिसे पहले एकल पीठ ने खारिज कर दिया। लेकिन बाद में उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने उनके पक्ष में निर्णय दिया और राज्य सरकार को 2015 से उन्नत वेतनमान देने का निर्देश दिया। राज्य सरकार ने इस फैसले के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दायर की, जिसे खारिज कर दिया गया।
सुप्रीम कोर्ट का फैसला
राज्य सरकार ने उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका (SLP) दायर की, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इसे खारिज कर दिया। यह फैसला शिक्षकों के पक्ष में एक मिसाल बन गया है और उनके अधिकारों को सशक्त बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
राज्य और शिक्षकों पर प्रभाव
इस फैसले के बाद, राज्य सरकार को शिक्षकों को वेतनमान और बकाया राशि का भुगतान करना होगा। अनुमान लगाया जा रहा है कि लगभग 70,000 शिक्षकों को इसका लाभ मिलेगा और राज्य सरकार को 7,000 करोड़ रुपये खर्च करने होंगे। यह फैसला शिक्षकों के अधिकारों को मान्यता देता है और समय पर पदोन्नति और उचित वेतनमान देने की आवश्यकता को रेखांकित करता है।
क्या होगी सरकार की अगली जिम्मेदारी
अब छत्तीसगढ़ सरकार को शिक्षकों की पात्रता की जांच कर, बकाया राशि की गणना करनी होगी और समय पर भुगतान सुनिश्चित करना होगा। यह निर्णय केवल शिक्षकों के लिए नहीं, बल्कि पूरे शिक्षा तंत्र को मजबूत करने के लिए भी एक प्रेरणादायक कदम है।
शिक्षकों के अधिकारों की विजय
सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला छत्तीसगढ़ के शिक्षकों के लिए बड़ी जीत है। यह न केवल वेतन असमानता की समस्या को हल करता है बल्कि शिक्षकों को उनके अधिकार दिलाने में भी मदद करता है। यह न्याय और संघर्ष की जीत का प्रतीक है। राज्य सरकार के लिए यह एक महत्वपूर्ण कदम होगा कि वह इस फैसले को शीघ्रता से लागू करे और शिक्षकों को उनका उचित हक प्रदान करे।
RAIPUR : नगर निगम में मेयर इन काउंसिल (MIC) की घोषणा, देखे लिस्ट और उनकी भूमिका
रायपुर की महापौर मीनल चौबे ने मेयर इन काउंसिल (MIC) के 14 सदस्यों के नामों की घोषणा की है। ये सदस्य विभिन्न विभागों की जिम्मेदारी संभालेंगे और शहर के विकास व प्रशासन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
क्या होती है मेयर इन काउंसिल (MIC) और इसकी भूमिका?
मेयर इन काउंसिल (MIC) नगर निगम की एक कार्यकारी समिति होती है, जो महापौर के नेतृत्व में कार्य करती है। इसका मुख्य उद्देश्य नगर निगम की नीतियों और योजनाओं को लागू करना और शहर की प्रशासनिक व्यवस्था को सुचारू रूप से संचालित करना है। MIC निम्नलिखित कार्यों को संभालती है:
- शहरी विकास और बुनियादी ढांचे का प्रबंधन – सड़कों, पुलों, स्ट्रीट लाइट और सार्वजनिक स्थलों का रखरखाव।
- स्वच्छता और स्वास्थ्य सेवाएं – कचरा प्रबंधन, जल आपूर्ति और स्वच्छता योजनाओं का क्रियान्वयन।
- शिक्षा और सामाजिक कल्याण – नगर निगम द्वारा संचालित स्कूलों, महिला और बाल विकास योजनाओं का संचालन।
- परिवहन और यातायात प्रबंधन – सड़कों पर ट्रैफिक सुधार और परिवहन सुविधाओं का विस्तार।
- पर्यावरण संरक्षण और हरित क्षेत्र विकास – शहर में वृक्षारोपण, उद्यानों का रखरखाव और प्रदूषण नियंत्रण।
- नगर निगम की वित्तीय योजना और राजस्व संग्रह – संपत्ति कर, जल कर और अन्य राजस्व स्त्रोतों का प्रबंधन।
- आपदा प्रबंधन और नागरिक सुरक्षा – बाढ़, आग और अन्य आपदाओं से निपटने के लिए योजनाएं तैयार करना।
MIC सदस्यों की सूची और उनके विभाग
- दीपक जायसवाल – लोक कर्म विभाग
- डॉ. अनामिका सिंह – सामान्य प्रशासन
- मनोज वर्मा – नगरीय नियोजन एवं भवन अनुज्ञा
- अवतार भारती बागल – राजस्व
- संतोष साहू – जल कार्य विभाग
- गायत्री चंद्राकर – लोक स्वास्थ्य एवं स्वच्छता विभाग
- सुमन अशोक पांडे – विद्युत एवं यांत्रिकी
- संजय श्रीवास्तव – शिक्षा एवं संस्कृति
- विजय चौधरी – परिवहन एवं यातायात
- किरणमयी नायक – महिला एवं बाल विकास
- राजेश शर्मा – खेल एवं युवा कल्याण
- श्रीमती राधा वर्मा – सामाजिक न्याय
- अजय यादव – पर्यावरण एवं उद्यानिकी
- सुनील सोनी – सूचना प्रौद्योगिकी एवं जनसंपर्क
नगर निगम प्रशासन में MIC की भूमिका क्यों महत्वपूर्ण है?
MIC नगर निगम की नीतियों और योजनाओं को धरातल पर उतारने में अहम भूमिका निभाती है। यह एक कैबिनेट की तरह कार्य करती है, जिसमें अलग-अलग विभागों के लिए जिम्मेदार सदस्य होते हैं। MIC सदस्यों का कार्यकाल महापौर के कार्यकाल के समान होता है और वे नगर निगम की आम बैठकों में महत्वपूर्ण निर्णय लेते हैं।
छत्तीसगढ़ में स्मार्ट प्रीपेड मीटर लागू अब खुद करना होगा बिजली का रिचार्ज जानिए कब से होगी शुरुआत..
केंद्र सरकार की रिवैंप्ड डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर स्कीम आरडीएसएस के तहत इन स्मार्ट मीटरों की स्थापना की जा रही है इस पहल से छत्तीसगढ़ स्मार्ट मीटर लगाने वाले राज्यों में तीसरे स्थान पर पहुंच गया है इसके तहत कृषि उपभोक्ताओं को छोड़कर सभी घरेलू और व्यावसायिक उपभोक्ताओं के यहां स्मार्ट मीटर लगाए जाएंगे
छत्तीसगढ़ में जून 2025 से बिजली बिल की परंपरागत व्यवस्था खत्म होने जा रही है प्रदेश के 11 लाख घरों में अब बिजली बिल नहीं आएगा बल्कि उपभोक्ताओं को अपने घरों में लगे प्रीपेड स्मार्ट मीटर को रिचार्ज करना होगा साल के अंत तक यह सुविधा राज्य के 42 लाख अन्य घरों में भी लागू कर दी जाएगी
कैसे काम करेगा स्मार्ट मीटर
इन प्रीपेड मीटरों में मैनुअल रीडिंग की जरूरत नहीं होगी बिजली विभाग के कर्मचारी दूरस्थ प्रणाली से उपभोक्ताओं की बिजली खपत की निगरानी कर सकेंगे मीटर में लगे छोटे मॉडम को सर्वर और उपभोक्ता के मोबाइल से जोड़ा जाएगा जिससे उपभोक्ताओं को उनकी खपत और बैलेंस की जानकारी मिलती रहेगी
रायपुर सबसे आगे बिलासपुर दूसरे स्थान पर
राज्य में सबसे अधिक रायपुर में 2.59 लाख स्मार्ट मीटर लगाए गए हैं इसके बाद बिलासपुर 1.09 लाख धमतरी 98 हजार बलौदाबाजार 78 हजार महासमुंद 82 हजार राजनांदगांव 67 हजार जांजगीर चांपा 29 हजार और कोरबा 42 हजार में स्मार्ट मीटर इंस्टॉल किए जा चुके हैं
बिहार और असम में पहले से लागू
बिहार और असम में स्मार्ट प्रीपेड मीटर पहले से लागू किए जा चुके हैं इन राज्यों में उपभोक्ता मोबाइल रिचार्ज की तरह ही अपने मीटर को एडवांस रिचार्ज कर रहे हैं जिससे अधिक बिल और गलत रीडिंग की शिकायतें खत्म हो गई हैं
छत्तीसगढ़ में 59 लाख बिजली उपभोक्ता
छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत वितरण कंपनी के अनुसार प्रदेश में कुल 59 लाख बिजली उपभोक्ता हैं जिनमें से 5.5 लाख कृषि उपभोक्ताओं को इस योजना से बाहर रखा गया है
स्मार्ट मीटर से जुड़े जरूरी सवाल और जवाब
क्या मीटर लगते ही रिचार्ज करना होगा
मीटर लगाने के बाद पहले दो महीने तक यह पोस्टपेड मोड पर रहेगा इसके बाद उपभोक्ताओं को प्रीपेड मोड में शिफ्ट कर दिया जाएगा
रिचार्ज की न्यूनतम और अधिकतम सीमा क्या होगी
अब तक कोई निश्चित सीमा तय नहीं की गई है उपभोक्ता अपनी बिजली खपत के अनुसार रिचार्ज करा सकेंगे
बैलेंस खत्म होने की जानकारी कैसे मिलेगी
उपभोक्ताओं को तीन स्टेप में एसएमएस अलर्ट मिलेगा
पहला जब बैलेंस 7 दिन की खपत के बराबर रहेगा
दूसरा जब बैलेंस 3 दिन की खपत के बराबर होगा
तीसरा जब बैलेंस 1 दिन की खपत के बराबर होगा
इसके अलावा क्रेडिट लिमिट शुरू होने और कनेक्शन कट होने से पहले भी चेतावनी मैसेज भेजा जाएगा
अगर बैलेंस खत्म हो गया तो क्या तुरंत बिजली कट जाएगी
उपभोक्ताओं को अतिरिक्त 300 तक का क्रेडिट दिया जाएगा जिसे अगले रिचार्ज में समायोजित किया जाएगा
अगर रात में क्रेडिट लिमिट खत्म हो जाए तो क्या बिजली बंद होगी
बिजली सिर्फ दिन में 10 बजे से दोपहर 2 बजे तक ही काटी जाएगी छुट्टी के दिन बिजली नहीं काटी जाएगी
स्मार्ट मीटर से उपभोक्ताओं को क्या फायदे होंगे
सटीक बिलिंग गलत बिलिंग और अतिरिक्त चार्ज से मुक्ति
खर्च पर नियंत्रण उपभोक्ता अपनी बिजली खपत पर नजर रख सकेंगे
डिजिटल सुविधा मोबाइल से ही बैलेंस चेक और रिचार्ज की सुविधा
पारदर्शिता किसी बाहरी कर्मचारी द्वारा मीटर रीडिंग की जरूरत नहीं होगी
उपमुख्यमंत्री अरूण साव से काम करवाने का प्रलोभन देकर कोरबा के पार्षदों से बयान दिलाने की साजिश का खुलासा
कोरबा में छत्तीसगढ़िया नेतृत्व के खिलाफ साजिश: कौन हैं इसके पीछे के मास्टरमाइंड?
रायपुर: पुरानी नगर निगम बिल्डिंग में भीषण आग, इलाके में मची अफरा-तफरी
रायपुर के मालवीय रोड स्थित पुरानी नगर निगम बिल्डिंग में आज अचानक आग लगने से इलाके में अफरातफरी मच गई। यह घटना गोलबाजार थाना क्षेत्र में हुई, जिससे बाजार में मौजूद दुकानदार और स्थानीय लोग काफी परेशान हो गए।
आग लगने का कारण स्पष्ट नहीं हो पाया है, लेकिन प्रारंभिक जांच में आशंका जताई जा रही है कि ज़मीन पर फेंके गए कचरे में आग लगी हो, जो तेज हवा और गर्मी के कारण फैल गई। आग लगते ही फायर ब्रिगेड की टीम को सूचित किया गया, जिसके बाद दमकल की गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया।
बिल्डिंग के चारों ओर दुकाने होने के कारण आग के और फैलने की आशंका थी, लेकिन दमकल विभाग की त्वरित कार्रवाई से बड़ा नुकसान टल गया। इस घटना में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है।
झारखंड का मोस्ट वांटेड गैंगस्टर अमन साहू एनकाउंटर में ढेर, छत्तीसगढ़ से क्या था कनेक्शन ?
झारखंड पुलिस ने 11 मार्च 2025 को पलामू जिले में एक बड़ी कार्रवाई करते हुए कुख्यात गैंगस्टर अमन साहू को एनकाउंटर में मार गिराया। अमन साहू झारखंड, बिहार और छत्तीसगढ़ में सक्रिय था और उस पर हत्या, लूट, रंगदारी और फिरौती जैसे 100 से अधिक संगीन मामले दर्ज थे।
कैसे हुआ एनकाउंटर?
अमन साहू को छत्तीसगढ़ के रायपुर जेल से झारखंड लाया जा रहा था। उसे रांची में एक कोयला कारोबारी पर हमले और हजारीबाग में एनटीपीसी अधिकारी की हत्या के मामलों में पूछताछ के लिए ट्रांसफर किया गया था।
लेकिन रास्ते में पलामू जिले के चैनपुर-रामगढ़ रोड पर पुलिस वाहन दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इसी अफरातफरी का फायदा उठाकर अमन ने एक पुलिसकर्मी का हथियार छीनने की कोशिश की और भागने लगा। पुलिस ने उसे चेतावनी दी, लेकिन जब उसने फायरिंग शुरू कर दी, तो जवाबी कार्रवाई में वह मौके पर ही ढेर हो गया।
छत्तीसगढ़ कनेक्शन: रायपुर जेल में रहकर भी चलाता था गैंग
अमन साहू का छत्तीसगढ़ से गहरा नाता था। पुलिस जांच में यह सामने आया है कि वह रायपुर, दुर्ग और बिलासपुर जैसे शहरों में अपने नेटवर्क के जरिए कोयला कारोबारियों और ठेकेदारों से रंगदारी वसूलता था।
सूत्रों के मुताबिक, अमन साहू छत्तीसगढ़ की जेल में रहने के बावजूद अपने गैंग को संचालित कर रहा था। उसने रायपुर जेल से ही कई ठेकेदारों को धमकाने और रंगदारी मांगने के आदेश दिए थे।
इसके अलावा, उसके छत्तीसगढ़ के कई अपराधियों और बाहरी गिरोहों से संबंध थे। वह यहां के लोकल गैंगस्टरों और नक्सली नेटवर्क से जुड़ा हुआ था, जिससे उसे लॉजिस्टिक सपोर्ट और हथियारों की सप्लाई मिलती थी।
अमन साहू और लॉरेंस बिश्नोई गैंग का लिंक
अमन साहू का नेटवर्क सिर्फ झारखंड-छत्तीसगढ़ तक सीमित नहीं था। जांच में पता चला है कि उसके संबंध कुख्यात गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई से भी थे। वह छत्तीसगढ़ और झारखंड में हथियारों की सप्लाई करता था और बदले में आधुनिक असलहे और मदद हासिल करता था।
छत्तीसगढ़ पुलिस पहले से ही इस मामले की जांच कर रही थी कि रायपुर जेल में रहते हुए अमन साहू ने किन-किन अपराधियों से संपर्क किया और कौन-कौन उसके गैंग का हिस्सा था।
पुलिस की बड़ी सफलता, आगे क्या?
झारखंड पुलिस के लिए यह एनकाउंटर एक बड़ी सफलता है, लेकिन अब छत्तीसगढ़ पुलिस भी सतर्क हो गई है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि अमन साहू के छत्तीसगढ़ में कौन-कौन से सहयोगी हैं और उसका गैंग अब किसके इशारों पर काम करेगा।
इस कार्रवाई के बाद झारखंड और छत्तीसगढ़ पुलिस का फोकस अब उसके पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करने पर है। आने वाले दिनों में उसके सहयोगियों पर भी बड़ी कार्रवाई होने की संभावना है।
अमन साहू की मौत से झारखंड और छत्तीसगढ़ की संगठित अपराध की दुनिया में हलचल मच गई है। यह देखना दिलचस्प होगा कि पुलिस इस गैंग को पूरी तरह खत्म करने में कितनी सफल होती है।
छत्तीसगढ़ शराब घोटाला: 4000 करोड़ रुपये का भ्रष्टाचार ? जानिए पूरा मामला...
भूपेश बघेल और उनके बेटे पर ED की छापेमारी
छत्तीसगढ़ में बहुचर्चित शराब घोटाले को लेकर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने सोमवार को राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता भूपेश बघेल और उनके बेटे चैतन्य बघेल से जुड़े 14 ठिकानों पर छापेमारी की। ED के अनुसार, चैतन्य बघेल को कथित रूप से इस घोटाले से अर्जित काले धन का हिस्सा मिला था। जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि इस घोटाले के माध्यम से करीब 2,161 करोड़ रुपये विभिन्न फर्जी योजनाओं के जरिए हेराफेरी कर siphon किए गए। छत्तीसगढ़ में शराब बिक्री में अनियमितताओं का कुल मूल्य अब करीब 4,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।
इससे पहले हुई गिरफ्तारियाँ और आरोप पत्र
इससे पहले जनवरी 2024 में ED ने कांग्रेस नेता और पूर्व मंत्री कवासी लखमा को इस मामले में गिरफ्तार किया था। जुलाई 2023 में ED ने अनवर ढेबर (रायपुर के मेयर एजाज ढेबर के भाई), पूर्व IAS अधिकारी अनिल टुटेजा और छत्तीसगढ़ स्टेट मार्केटिंग कॉर्पोरेशन लिमिटेड (CSMCL) के MD अरुणपति त्रिपाठी सहित कई लोगों के खिलाफ आरोप पत्र दायर किया था।
घोटाले का पूरा मामला क्या है?
छत्तीसगढ़ में केवल राज्य सरकार द्वारा संचालित दुकानें ही शराब बेच सकती हैं। राज्य में कुल 672 सरकारी शराब दुकानें हैं, जो प्रतिदिन 28-32 करोड़ रुपये की नकद बिक्री करती हैं। ED के अनुसार, 2019 से 2022 के बीच जब छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की सरकार थी, इस दौरान शराब बिक्री में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार हुआ। सरकारी ठेके से बिना हिसाब-किताब वाली देशी शराब बेची गई, जिससे सरकार को 3,800 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। शराब बिक्री में व्यवसायी-राजनेता-अधिकारी गठजोड़ के जरिए बड़े पैमाने पर काला धन बनाया गया। इस घोटाले का पैसा सरकारी खजाने में जमा न होकर सीधे सिंडिकेट के लोगों की जेब में चला गया।
भाजपा सरकार में FIR और जांच की प्रगति
जनवरी 2024 में, जब भाजपा सत्ता में आई, तब इस घोटाले में 70 लोगों को आरोपी बनाते हुए FIR दर्ज की गई, जिनमें आबकारी विभाग के अधिकारी, राजनेता और अन्य लोग शामिल हैं। अप्रैल 2024 में ED ने इस मामले में दूसरी ECIR (Enforcement Case Information Report) दर्ज की, जबकि इससे पहले SC ने ED की पहली ECIR रद्द कर दी थी। अब तक 205 करोड़ रुपये की संपत्ति ED द्वारा जब्त की जा चुकी है।
भूपेश बघेल और कांग्रेस का रुख
भूपेश बघेल ने इस घोटाले से जुड़े सभी आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताते हुए खारिज किया है। कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने ED की छापेमारी पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि "BJP इस प्रकार की कार्रवाइयों से कांग्रेस को रोक नहीं सकती। हम न डरते हैं, न डरेंगे।" कांग्रेस का आरोप है कि भाजपा सरकार विपक्ष को निशाना बनाने के लिए केंद्रीय एजेंसियों का दुरुपयोग कर रही है।
आगे क्या होगा?
छत्तीसगढ़ शराब घोटाले की जांच अब और तेज हो गई है। ED ने 2,161 करोड़ रुपये के कथित भ्रष्टाचार की परतें खोलनी शुरू कर दी हैं और अब तक कई बड़े नेताओं और अधिकारियों पर शिकंजा कस चुका है। भाजपा और कांग्रेस के बीच इस मुद्दे पर तीखी सियासी जंग छिड़ी हुई है। अब यह देखना होगा कि ED की आगे की कार्रवाई क्या होती है और अदालत में यह मामला किस दिशा में आगे बढ़ता है।
IFS अशोक कुमार के बाद ACB और EOW की किस वन अधिकारी पर है नजर ?
छत्तीसगढ़ में निलंबित IFS अधिकारी अशोक पटेल के खिलाफ ACB (एंटी करप्शन ब्यूरो) और EOW (आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा) की कार्यवाही के बाद वन विभाग में बड़े अधिकारी सतर्क हो गए हैं। खासकर बिलासपुर कोरबा और मरवाही के वन मंडल अधिकारी DFO और CCF परेशान है कि अगला नंबर कहीं उनका तो नहीं!
EOW और ACB की नजर जंगल के सौदागरों पर नप सकते हैं मंत्री के खास भी
सूत्रों के मुताबिक वन विभाग के कई अधिकारियों ने बजट खत्म करने के लिए जल्दबाजी में टेंडर पास कर दिया जिसमें चेक पहले पास कर दिया गया और बाद में बिल तैयार करवाया गया आपको बता दे कि सरकारी काम में पहले बिल तैयार होता है उसके बाद ही चेक जारी होता है मगर बजट का पैसा खत्म करने के लिए फॉरेस्ट विभाग के अधिकारियों ने पहले चेक जारी कर दिया और बाद में बिल तैयार किया। अब ACB और EOW की नजर इन गड़बड़ियों पर है, जिससे भ्रष्टाचार में लिप्त वन अधिकारी डरे हुए हैं
इस बात का ताजा उदाहरण यह है कि कुछ जिलों के वन विभाग के दफ्तरों में नाली एवं बाउंड्री वॉल का कार्य किया जा रहा है जिसमें पहले चेक पास कर दिया गया है और बाद में बिल तैयार किया जा रहा है। वन विभाग के अधिकारी बिल और वाउचर का तारीख उलट फेर करके बदल देते हैं ताकि वन विभाग के खजाने का पैसा अपने भ्रष्टाचारी बुद्धि से अपने पॉकेट में रख सकें।
सूत्रों के हवाले यह भी खबर है कि वन विभाग के अधिकारी बड़ी-बड़ी सरकारी एवं निजी कंपनियां से मोटा रकम वसूल कर उन कंपनियों के प्रदूषण नियंत्रण के आंकड़ों पर भी फेर बदल करते हैं और उस रकम को अधिकारी और नेताओं के बीच बांटा जाता है। इस बात में कितनी सच्चाई है यह तो आप जांच के बाद ही ACB और EOW बता सकते हैं।
बिलासपुर और कोरबा रेंज के अधिकारियों पर गिर सकती है गाज