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छत्तीसगढ़ की शान, पद्म विभूषण तीजन बाई ने दुनिया को कहा अलविदा

 पद्म विभूषण पंडवानी गायिका तीजन बाई नहीं रहीं, छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति को अपूरणीय क्षति

 

रायपुर। छत्तीसगढ़ की शान, विश्व प्रसिद्ध पंडवानी गायिका और पद्म विभूषण सम्मान से सम्मानित तीजन बाई का 70 वर्ष की आयु में निधन हो गया। लंबे समय से अस्वस्थ चल रहीं तीजन बाई ने शनिवार देर रात करीब 3:15 बजे रायपुर में अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर से छत्तीसगढ़ सहित पूरे देश के कला, साहित्य और सांस्कृतिक जगत में शोक की लहर दौड़ गई है।
तीजन बाई ने अपने अद्वितीय गायन, दमदार अभिनय और प्रभावशाली मंच प्रस्तुति के माध्यम से पंडवानी कला को नई पहचान दिलाई। उन्होंने महाभारत की कथाओं को जिस जीवंत शैली में प्रस्तुत किया, उसने देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी लाखों लोगों को प्रभावित किया। उनकी कला ने छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक परंपरा को अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचाया और पंडवानी को वैश्विक पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
दशकों तक उन्होंने भारत की लोक संस्कृति का प्रतिनिधित्व करते हुए दुनिया के अनेक देशों में अपनी प्रस्तुतियां दीं। उनकी कला, समर्पण और योगदान के सम्मान में भारत सरकार ने उन्हें पद्मश्री, पद्म भूषण और बाद में देश के दूसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म विभूषण से सम्मानित किया। इसके अलावा उन्हें संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार सहित कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सम्मानों से भी नवाजा गया।
तीजन बाई का जीवन संघर्ष, प्रतिभा और समर्पण की मिसाल रहा। उन्होंने अपनी कला के माध्यम से न केवल छत्तीसगढ़ का गौरव बढ़ाया, बल्कि भारतीय लोक संस्कृति को भी विश्वभर में नई पहचान दिलाई।
उनका निधन केवल छत्तीसगढ़ के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे भारतीय लोक कला जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति है। उनकी आवाज, उनकी शैली और पंडवानी के प्रति उनका समर्पण आने वाली पीढ़ियों को हमेशा प्रेरित करता रहेगा।
सीजी अपडेट परिवार की ओर से पद्म विभूषण तीजन बाई को भावपूर्ण श्रद्धांजलि। ईश्वर दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करें। ॐ शांति।

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