कम उम्र में राज्य मंत्री दर्जा प्राप्त करने वाले युवा विधायक प्रत्याशी सुशांत शुक्ला कौन है ?
बिलासपुर - भाजपा ने बेलतरा विधासभा क्र 31 से एक युवा चेहरे को मैदान में उतारा है। युवा सुशांत शुक्ला पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ेंगे। उनके खिलाफ कांग्रेस ग्रामीण के जिला अध्यक्ष विजय केसरवानी मैदान में होंगे, जिनसे उनकी सीधी टक्कर है। बेलतरा में ग्रामीण क्षेत्र का ज्यादा प्रभाव है। और यह माना जा रहा है की छत्तीसगढ़िया चेहरा ही बेलतरा के लोगो की पहली पसंद मानी जाती है। जिसके चलते बीजेपी ने छत्तीसगढ़िया सुशांत शुक्ला को टिकट दिया है। वही दूसरी तरफ विजय केसरवानी भी कांग्रेस के अच्छे नेताओ में से एक माने जाते है।
तो जानते है कौन है युवा सुशांत शुक्ला जिन्हे जनता इतना समर्थन दे रही है ?
40 वर्षीय सुशांत शुक्ला के पिता का नाम हीरामणी शुक्ला है। उनके पिता छत्तीसगढ़ ग्रामीण बैंक से सेवानिवृत हुए हैं। बिलासपुर के सरकंडा के शिव घाट में रहने वाले सुशांत शुक्ला चार भाई बहनों में तीसरे नंबर के हैं। उनसे बड़े एक भाई व एक बहन है, व उनसे छोटी एक बहन है। सुशांत शुक्ला के पिता हीरामणि शुक्ला भी आरएसएस पृष्ठभूमि के रहे हैं। वे आरएसएस के प्रांत बौद्धिक प्रमुख रह चुके हैं। छतीसगढ़ी राजभाषा को पहचान दिलवाने वाले उनके बड़े पिता नंदकिशोर शुक्ला आरएसएस के कैडर बेस कार्यकर्ता रहे हैं। वे अटल बिहारी वाजपेयी के आरएसएस में सक्रिय होने के समय से आरएसएस में रहें हैं और प्रचारक की भूमिका निभाई है। नंदकिशोर शुक्ला ने छत्तीसगढ़ी को पहचान दिलाने के लिए साइकिल में मिलों लंबी यात्रा की है। वह पत्रकारिता से भी 30 वर्षों से जुड़े रहे हैं। उनके अथक प्रयासों से छत्तीसगढ़ी को राजभाषा का दर्जा मिला है। वे छत्तीसगढ़ी राजभाषा मंच व मोर चिन्हारी छत्तीसगढ़ी संस्था के सरंक्षक है।
सुशांत शुक्ला ने 12वीं के बाद बीकॉम सेकंड ईयर तक की शिक्षा हासिल की है। वह पेशे से व्यवसायी हैं। प्रदेश के दिग्गज बीजेपी नेता व केंद्रीय मंत्री के अलावा बिलासपुर सांसद रहे दिलीप सिंह जूदेव की उंगली पड़कर सुशांत शुक्ला ने राजनीति का ककाहरा सिखने वाले सुशांत राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के बाल स्वयं सेवक रहें है। सुशांत शुक्ला जूदेव के कट्टर समर्थको में गिने जाते थे। वे जूदेव सेना प्रमुख भी थे। गुरु घासीदास विश्वविद्यालय की छात्र राजनीति में विश्वविद्यालय छात्र महासंघ पैनल बनाकर सुशांत शुक्ला काफी लंबे समय तक सक्रिय रहे हैं। उनके पैनल ने विश्वविद्यालय छात्रसंघ में कई बार जीत हासिल की है। बेलतरा विधानसभा में स्थित गुरु घासीदास विश्वविद्यालय को केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा दिलवाने के लिए चलाए गए आंदोलन में सुशांत शुक्ला और उनके विश्वविद्यालय छात्र महासंघ पैनल की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। 2009 में गुरु घासीदास विश्वविद्यालय के केंद्रीय विश्वविद्यालय बनने के बाद सुशांत शुक्ला का छात्र महासंघ पैनल ब्रदरहुड़ पैनल में परिवर्तित हो गया।
सुशांत शुक्ला राज्य युवा आयोग के सदस्य रहे हैं। इस दौरान बेहद कम उम्र में उन्हें राज्य मंत्री का दर्जा प्राप्त था। वह भारतीय जनता युवा मोर्चा राष्ट्रीय कार्य समिति के 2011 से 2016 तक सदस्य रहें हैं। सुशांत शुक्ला 2016 से 2020 तक भारतीय जनता युवा मोर्चा के राष्ट्रीय संयोजक भी रहे हैं
सुशंत शुक्ला अपने खुले विचारधारा और बेहद मुखर अंदाज के कारण भी चर्चे में बने रहते है। पार्टी ने सुशांत शुक्ला पर भरोसा जताया है। जिसका असर प्रचार के दौरान देखने को मिल रहा है। महिलाओं से लेकर बच्चो तक में उत्साह देखने को मिल रहा है।