छत्तीसगढ़ / बिलासपुर

जसबीर सिंह क्यों है कौशिक बंधुओ से आगे जाने इस खबर में।

 

छत्तीसगढ़ की जनता 2013 और 2018 के चुनाव की तुलना में अब ज्यादा समझदार और साक्षर हो चुकी है और बिल्हा विधानसभा में इस बार जसबीर सिंह कौशिक बंधुओ यानी धरमलाल कौशिक और सियाराम कौशिक से आगे नजर आ रहे हैं। इसका सीधा कारण बिल्हा के विकास से जुड़ा हुआ है। सियाराम कौशिक पहले भी बिल्हा विधासभा का नेतृत्व विधानसभा में कर चुके हैं मगर 2018 का चुनाव जोगी कांग्रेस से लड़ने के कारण सियाराम कौशिक को हार का सामना करना पड़ा था। चुनाव हारने के बाद सियाराम कौशिक जनता के बीच 5 सालो में कभी ज्यादा नज़र नही आए न ही कोरोना जैसी आपदा में जनता की मदद करते दिखे मगर 2023 में कांग्रेस ने इन्हे बिल्हा विधानसभा में बतौर प्रत्याशी के पर मैदान में उतारा है। चर्चा है कि इनके खुद के कार्यकर्ता इनको समर्थन देते नजर नहीं आ रहे और सियाराम कौशिक को जनता के बीच आलोचना का भी सामना करना पढ रहा है।

 

धरमलाल कौशिक का नाम भाजपा के बड़े नेताओं में आता है। कौशिक 2 बार बिल्हा के विधायक भी रहे हैं मगर जनता के लिए इन्होंने जितना किया जनता उससे खुश नजर नहीं आ रही है। क्योंकि दोनों ही पार्टियों से बिल्हा में कभी किसी नए चेहरे को उम्मीदवार के तौर पर मौका नहीं मिला है। पिछले 20 साल से कौशिक बंधुओ के बीच बिल्हा के लोग उलझ कर रह गए हैं। मगर इस बार जसबीर सिंह को जनता विकल्प के तौर पर देख रही है और अपना समर्थन भी दे रही है। क्योंकि जसबीर सिंह पिछले 10 साल से बिल्हा की जनता के बीच सक्रीय रहे हैं और लोगो के साथ जमीनी स्तर पर दिखाई दिए हैं।

 

कौशिक बंधुओ से क्यों है जनता नाराज ?

 

बिल्हा की जनता ने कौशिक बंधुओ को 10-10 साल यानी 20 साल मौका दिया तब भी कौशिक बंधु जनता को मूलभूत सुविधा मुहैया कराने में नाकाम ही रहे। कई गांवों में पानी बिजली के लिए लोग अब भी मोहताज हैं तो किसी गांव को स्कूल की जरूरत है। कई सारी परेशानियों से जनता गुजर रही है। मगर कौशिक बंधु सिर्फ चुनाव में ही लोगो को याद करते हैं। ऐसे में जनता ने अपनी मंशा साफ जाहिर की है। मगर कौशिक बंधु यह नही सोचते हैं कि उनके दिए गए चंद लिफाफो से जनता बिक नही जायेगी और अगर जनता चंद लिफाफों को ले कर अपने बच्चो के भविष्य को अंधकार, गरीबी और दिहाड़ी में ही देखना चाहे तो वह एक बार और भरोसा कर सकती है। मगर 2023 का चुनाव त्रिकोणीय होने वाला है। इस बार बिल्हा की जनता परिवारवाद को समर्थन देगी या एक नया विकल्प चुनेगी यह तो चुनाव परिणाम की घोषण के बाद ही पता चलेगा।

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