शिक्षा विभाग के संयुक्त संचालकों के निलंबन पर कोर्ट ने लगाई रोक, पूर्व सरकार में किए गए थे निलंबित
रायपुरl कोर्ट ने हाल ही में सभी अफसरों की निलंबन कार्रवाई को खत्म करके उन्हें पुन: उन्हीं जगहों पर पदस्थ रहने (रि-स्टे करना) के निर्देश दिए हैं, जहां ये अधिकारी कार्यरत थे। इस निर्णय से रायपुर संभाग के के तत्कालीन संयुक्त संचालक के.कुमार ने अब एससीईआरटी में संयुक्त संचालक का पदभार ग्रहण करने का निर्णय लिया है। साथ ही, सरगुजा संभाग के संयुक्त संचालक हेमंत उपाध्याय, बिलासपुर संभाग के संयुक्त जेके प्रसाद और दुर्ग संभाग के संयुक्त संचालक जीएस मरकाम की भी निलंबन कार्रवाई समाप्त हो गई है। इन अफसरों ने कोर्ट में निलंबन से बहाली के आवेदन को याचिका दी थी, और कोर्ट ने स्वीकार करते हुए कहा कि स्कूल शिक्षा विभाग को कारण बताते हुए निलंबन आदेश जारी करना चाहिए।
राज्य सरकार ने 90 दिनों के बाद भी किसी ठोस कारण की प्रस्तुति नहीं की है, और इसके परिणामस्वरूप कोर्ट ने निलंबन से बहाली के आवेदन को स्वीकार कर लिया है। पिछली सरकार ने पदोन्नत के बाद संशोधन करने का कारण किया था।
अधिकारिक सूत्रों की मानें के अनुसार, पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार में कुछ मंत्रियों और नेताओं ने राजनीतिक दृष्टिकोण से इन अफसरों से सहायक शिक्षक से शिक्षक में पदोन्नत होने वाले शिक्षकों के पदस्थापना आदेश में संशोधन कराया था। इसके पश्चात, पूर्व प्रमुख सचिव डा. आलोक शुक्ला और सचिव डा. एस. भारतीदासन ने इस मामले में बिना किसी प्रमाण के सभी अधिकारियों को ही दोषी ठहराते हुए निलंबित कर दिया था। इस निर्णय में अफसरों ने स्वीकार किया कि राजनीतिक हस्तक्षेप के कारण विभाग में पदास्थापना आदेश में संशोधन किया गया है। इसका मतलब है कि शिक्षा विभाग द्वारा इन अफसरों पर लगाए गए आरोपों में कोई ठोसीन प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया गया है।