SC/ST/OBC कर्मचारियों के जाति-आधारित डेटा को तत्काल जारी करने की भी मांग की है ताकि उनका सटीक प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जा सके. इसके अलावा समाज के सभी वर्गों से न्यायिक अधिकारियों और न्यायाधीशों की भर्ती के लिए एक भारतीय न्यायिक सेवा की स्थापना की भी मांग की जा रही है. जिसका लक्ष्य हायर ज्यूडिशियरी में SC, ST और OBC श्रेणियों से 50 फीसदी प्रतिनिधित्व लेना है.
संगठन ने केंद्र और राज्य सरकार के विभागों के साथ-साथ सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों में सभी बैकलॉग रिक्तियों को भरने का आह्वान किया है. निकाय ने कहा कि सरकारी प्रोत्साहन या निवेश से लाभान्वित होने वाली निजी क्षेत्र की कंपनियों को अपनी फमों में सकारात्मक कार्रवाई की नीतियां लागू करनी चाहिए. NACDAOR ने दलितों, आदिवासियों और ओबीसी से बुधवार को शांतिपूर्ण आंदोलन में भाग लेने की
अपील की है.
क्या हैं दो शर्त
एससी के भीतर किसी एक जाति को 100% कोटा नहीं दे सकतीं.
एससी में शामिल किसी जाति का कोटा तय करने से पहले उसकी हिस्सेदारी का पुख्ता डेटा होना चाहिए.
क्या है मांग?
भारत बंद बुलाने वाले संगठनों की मांग है कि सुप्रीम कोर्ट कोटे में कोटा वाले फैसले को वापस ले या पुनर्विचार करे.
आरजेडी सहित इन पार्टियों ने किया बंद का समर्थन
बसपा, आरजेडी ने आरक्षण के मुद्दे पर बुलाए गए भारत बंद का समर्थन किया है. चिराग पासवान की पार्टी ने भी बंद को समर्थन दिया है. वहीं जीतन राम मांझी और उनकी पार्टी ने कहा है कि वह बंद के खिलाफ हैं. और इसका समर्थन नहीं करते हैं. भीम आर्मी चीफ चंद्रशेखर आजाद भारत आदिवासी पार्टी मोहन लात रोत का भी समर्थन मिल रहा है. साथ ही कांग्रेस समेत कुछ पार्टियों के नेता भी समर्थन में हैं.
क्या छत्तीसगढ़ मे पड़ेगा भारत बंद का असर
चैंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष अमर पारवानी, महामंत्री अजय भसीन, कोषाध्यक्ष उत्तम गोलछा, कार्यकारी अध्यक्ष राजेन्द्र जग्गी, विक्रम सिंहदेव, राम मंधान, मनमोहन अग्रवाल से छत्तीसगढ़िया सर्व समाज महासंघ, सर्व समाज के पदाधिकारियों ने संपर्क किया। रायपुर के चैंबर भवन में पदाधिकारियों ने बैठक की।
समर्थन देने से चैंबर ने किया इनकार
बंद का समर्थन कर रहे संगठनों से आए पदाधिकारियों ने कहा कि हम सुप्रीम कोर्ट के जारी आरक्षण वर्गीकरण के आदेश के विरोध में 'भारत बंद' के लिए समर्थन मांगने पहुंचे हैं। चैंबर प्रदेश अयक्ष अमर पारवानी ने बताया कि राष्ट्रीय स्तर पर इस भारत बंद को लेकर जानकारी हमें नहीं मिली है। बिना पूर्व सूचना के अचानक बंद को समर्थन देने से चैंबर ने इनकार कर दिया।