छत्तीसगढ़ / रायपुर

छत्तीसगढ़ में बनेगा साइंस सिटी 30 एकड़ में देश का छठवां साइंस सिटी होगा तैयार

नया रायपुर में प्रस्तावित साइंस सिटी को लेकर आज उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा की अध्यक्षता में बैठक आयोजित की गई। देश का छठवां साइंस सिटी की स्थापना नवा रायपुर में किया जाएगा। बैठक में अपर मुख्य सचिव, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग रेणु जी पिल्लई, डायरेक्टर जनरल सीआरएससी डॉ. एस कर्मकार के सहित विभिन्न विभाग और विशेषज्ञों ने भाग लिया। बैठक का मुख्य उद्देश्य साइंस सिटी की अवधारणा, उसके उद्देश्यों, समाज पर प्रभाव, आर्थिक संभावनाओं और परियोजना के क्रियान्वयन की विस्तृत योजना पर चर्चा की।

इस दौरान विज्ञान नगरी के स्वरूप और इसकी उपयोगिता पर विस्तार से चर्चा की गई। उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि साइंस सिटी नवा रायपुर के सेक्टर 13 में 30 एकड़ भूमि में एक अत्याधुनिक विज्ञान केंद्र के रूप में विकसित की जाएगी, जिसमें शिक्षा और मनोरंजन का अनूठा संगम होगा। विज्ञान नगरी को “एडुटेनमेंट” (शिक्षा + मनोरंजन) की अवधारणा पर आधारित रखा जाएगा, जिससे छात्रों, युवाओं और आम नागरिकों को विज्ञान और प्रौद्योगिकी के प्रति रुचि विकसित करने का अवसर मिलेगा। यह केंद्र वर्चुअल रियलिटी (VR), इमर्सिव डिस्प्ले, डिजिटल इंटरैक्टिव तकनीकों का उपयोग करेगा, जिससे आगंतुकों को विज्ञान की गहरी समझ विकसित करने में सहायता मिलेगी। उपमुख्यमंत्री ने कहा कि साइंस सिटी को छात्रों, शोधकर्ताओं, पर्यटकों और आम जनता के लिए आकर्षक और ज्ञानवर्धक बनाये।


साइंस सिटी में विज्ञान पार्क, थ्रीडी थिएटर, अंतरिक्ष एवं खगोल विज्ञान केंद्र, जलवायु परिवर्तन गैलरी, रोबोटिक्स एवं ऑटोमेशन लैब, स्मार्ट क्लासरूम, अनुसंधान प्रयोगशालाएं और इंटरएक्टिव डिस्प्ले हॉल जैसी अत्याधुनिक सुविधाएं शामिल होंगी। ये सभी सुविधाएं आगंतुकों को विज्ञान से जोड़ने और उन्हें नवीनतम वैज्ञानिक खोजों से अवगत कराने में सहायक होंगी। बैठक में साइंस सिटी के उद्देश्यों पर भी चर्चा की गई। विज्ञान और प्रौद्योगिकी के प्रति जनसामान्य में जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ यह केंद्र छात्रों को प्रायोगिक शिक्षा प्रदान करने में भी सहायक होगा। उपमुख्यमंत्री ने कहा कि साइंस सिटी का उद्देश्य केवल ज्ञान देना ही नहीं, बल्कि वैज्ञानिक दृष्टिकोण को विकसित करना और अनुसंधान को प्रोत्साहित करना का भी हो। इसके तहत स्कूल और कॉलेज के विद्यार्थियों को विज्ञान के बुनियादी सिद्धांतों को अनुभवात्मक रूप में सिखाने का मौका मिले।

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